गुरुवार, 26 नवंबर 2009

Mere Sapne: प्रेम -5

Mere Sapne: प्रेम -5

प्रेम 4

जहा मृत्यु भी इसे नही मिटा सकती वो ये प्रेम !इसलिए प्रेमी मृत्यु से नही डरता सभी डरते है प्रेमी मृत्यु की चिंता नही करता क्यूंकि वो कहता है मैंने उसे जन लिया है और "प्रेम ही मेरी परम-प्रार्थना है "

प्रेम -3

.....चाहे वो लैला-मजनू का हो या फिर शिरी-फरहाद का या मीरा का हो या राधा का ,इससे कोई फर्क नही पड़ता की दो व्यक्ति में प्रेम है या एक व्यक्ति और परमात्मा में प्रेम है ,प्रेम एक ही है
प्रेम टूटता है ? टूटता ही नही तो जोड़ने का सवाल ही नही उठता जिनसे मैंने प्यार किया है ,वो कभी नही टुटा ,इसलिए जोड़ने का कोई कारन ही नही जिनका प्रेम टुटा वो भ्रम में थे की वो प्रेम था ,उन्होंने किसी अलग चीज़ को ही प्रेम समझा ,लोभ को प्रेम समझा
आप किसीको कहते हो की मै तुमसे प्रेम करता लेकिन आप गहराई से सोचना प्रेम के बारेमे उसमे कुछ न कुछ पाने की तमन्ना है ,जिस्म पाने की चाहत ,धन पाने की इच्छा ,रुतबा पाने की तमन्ना कुछ न कुछ पाने की आकांक्षा है कही न कही वासना छिपी हुई है ,और जहा वासना है वहा प्रार्थना नही !जहा लोभ है वहा प्रेम नही
लेकिन हमारा प्रेम लोभी ही होता है
दिल भर जन चाहिए ,और दिल तभी भर आने की संभावना होती है जहा कोई वासना नही होती ,कोई इच्छा नही होती
ऐसे लोग है दुनियामे जिन्होंने सब कुछ दाव पे लगा दिया है वो प्रेमी है ,उन्होंने प्यार को समझा है ,बिनशर्त प्रेम किया है ,"जियेंगे साथ और मरेंगे साथ "
मेरे साथ रहना सस्ता नही है बहोत ही महँगा सौदा है
मुझे कवि ये बात नही जची "टूटे से फिर न जुड़े " टूटता ही नही है आजतक का अनुभव है की कभी नही टुटा और जो टुटा वो प्रेम था ही नही तो जोड़ेंगे तो गाठा पड़ेगा ही ना ,लेकिन ये धागा ऐसा थोड़े ही है जो टूटेगा
प्रेम एक अदृश्य धागा है ,बहोत ही तरल ,नाजुक एक हवा के झोके से भी टूटने वाला लेकिन तलवार से भी नही टूटता ......
क्रमश:................

प्रेम-2

........वो कहेंगे पागल है और हसेंगे तुमपर
प्रेम परम -आनंद है ,सुख है ,मन-शान्ति है सदिया बीती ,साल बीते,लम्हे गुजरे लेकिन अभी तक हम प्रेम को समझ नही पा रहे है
इसलिए मीरा कहती है न !!!!!!!!!!
एरी मै तो प्रेम दीवानी ,
मेरा दर्द न जाने कोय !
मेरे अंतर्मन में एक पीड़ा है मेरा दुःख कोई नही समझता ,मुझे उनपर दया आती है ,जो ख़ुद को बहोत समझदार समझते है वो कितने पागल है ,जो मुझे पागल समझते है मेरे मन में उनके लिए एक पीड़ा उठती है ,लेकिन वो नही समझेंगे ,क्योंकि जिन्हें अधेरे में रहने की आदत है वो क्या जाने उजाले की कीमत,जिन्होंने कभी प्रेम किया ही नही वो क्या जाने प्रेम को
प्रेम की पीड़ा कितनी मीठी होती है ,आपने बहोत सी पीड़ाऐ देखी होगी ,लेकिन इस पीड़ा की मिठास अगर नही देखी है तो कुछ भी नही देखा आपने , खली हाथ आए और खली हाथ जाओगे
प्रेम एक तीर्थ है, उसकी प्रतीक्षा कीजिये वो जरुर मिलेगा ,प्रतीक्षा करनेकी क्षमता होनी चाहिए जब अनंत प्रतीक्षा की जाती है ,उसे सफलता मिलती है और एक दिन आपकी प्रतीक्षा का आपको फल मिल जाता है क्यूंकि उसमे ध्यास होता है ,देनेकी भावना होती है ,सुन्दरता होती है ,सहजता होती है ,परिपक्वता होती है ,जो आपका है आपके लिए है वो प्रेम चलके आपके दिल के पास आता है ,आपको मिल जाता है और आपका जीवन सफल हो जाता है
रहिमन धागा प्रेम का ,मत तोड़ो चटकाय !
टूटे से फिर न जुड़े ,जुड़े गाथा पड़ जाय !
प्रेम एक नाजुक धागा है ,दिखता नही इतना वो बारीक़ है ,लेकिन वो धागा एकदूसरे को इतना बांधके रखता है के ,एक वख्त हम जंजीर तोड़ सकते है लेकिन ये प्रेम का धागा नही तोड़ सकते ,इस धागे को तलवार भी नही कट सकती और आग भी नही जला सकती
प्रेम का धागा कभी कोई तोड़ सका है ?और जो टुटा वो प्रेम था की नही ,वो कुछ अलग ही होगा ,भूल से प्रेम समझ बैठे और उसे प्रेम का लेबल लगा दिया
प्रेम कभी भी नही टूटता इतने बड़े इतिहास में प्रेम कभी टुटा दिखाई नही दिया ........क्रमश: