गुरुवार, 26 नवंबर 2009

प्रेम-2

........वो कहेंगे पागल है और हसेंगे तुमपर
प्रेम परम -आनंद है ,सुख है ,मन-शान्ति है सदिया बीती ,साल बीते,लम्हे गुजरे लेकिन अभी तक हम प्रेम को समझ नही पा रहे है
इसलिए मीरा कहती है न !!!!!!!!!!
एरी मै तो प्रेम दीवानी ,
मेरा दर्द न जाने कोय !
मेरे अंतर्मन में एक पीड़ा है मेरा दुःख कोई नही समझता ,मुझे उनपर दया आती है ,जो ख़ुद को बहोत समझदार समझते है वो कितने पागल है ,जो मुझे पागल समझते है मेरे मन में उनके लिए एक पीड़ा उठती है ,लेकिन वो नही समझेंगे ,क्योंकि जिन्हें अधेरे में रहने की आदत है वो क्या जाने उजाले की कीमत,जिन्होंने कभी प्रेम किया ही नही वो क्या जाने प्रेम को
प्रेम की पीड़ा कितनी मीठी होती है ,आपने बहोत सी पीड़ाऐ देखी होगी ,लेकिन इस पीड़ा की मिठास अगर नही देखी है तो कुछ भी नही देखा आपने , खली हाथ आए और खली हाथ जाओगे
प्रेम एक तीर्थ है, उसकी प्रतीक्षा कीजिये वो जरुर मिलेगा ,प्रतीक्षा करनेकी क्षमता होनी चाहिए जब अनंत प्रतीक्षा की जाती है ,उसे सफलता मिलती है और एक दिन आपकी प्रतीक्षा का आपको फल मिल जाता है क्यूंकि उसमे ध्यास होता है ,देनेकी भावना होती है ,सुन्दरता होती है ,सहजता होती है ,परिपक्वता होती है ,जो आपका है आपके लिए है वो प्रेम चलके आपके दिल के पास आता है ,आपको मिल जाता है और आपका जीवन सफल हो जाता है
रहिमन धागा प्रेम का ,मत तोड़ो चटकाय !
टूटे से फिर न जुड़े ,जुड़े गाथा पड़ जाय !
प्रेम एक नाजुक धागा है ,दिखता नही इतना वो बारीक़ है ,लेकिन वो धागा एकदूसरे को इतना बांधके रखता है के ,एक वख्त हम जंजीर तोड़ सकते है लेकिन ये प्रेम का धागा नही तोड़ सकते ,इस धागे को तलवार भी नही कट सकती और आग भी नही जला सकती
प्रेम का धागा कभी कोई तोड़ सका है ?और जो टुटा वो प्रेम था की नही ,वो कुछ अलग ही होगा ,भूल से प्रेम समझ बैठे और उसे प्रेम का लेबल लगा दिया
प्रेम कभी भी नही टूटता इतने बड़े इतिहास में प्रेम कभी टुटा दिखाई नही दिया ........क्रमश: